Wednesday, 17 January 2018

मैं पता तुम्हारा बता देती हूँ...!!!

कोई जो पूछे कि जीवन क्या है,
मैं नाम तुम्हारा बता देती हूं...
कोई जो पूछे कि दर्पण क्या है..
मैं आँखे तुम्हारी बता देती हूं..
कोई जो पूछे कि सुर क्या होते है,
मैं बाते तुम्हारी कह देती हूं..
कोई जो पूछे साथ क्या होता है,
मैं हाथ तुम्हारा थाम लेती हूं..
कोई जो पूछे क्यों तन्हाई में,
यूं ही मुस्कराती हो तुम,
मैं वजह तुम्हे बता देती हूं...
कोई जो पूछे पूजा क्या होती है,
आराध्य तुम्हे बता देती हूं...
कोई जो पूछे मंजिल कहाँ है तुम्हारी,
मैं पता तुम्हारा बता देती हूँ...!!!

Saturday, 13 January 2018

तुम्हारे साथ होने के भ्रम में...!!!

मेरे लिए प्यार का अर्थ,
सिर्फ तुम्हारा साथ है....
जिसके साथ हर मुश्किल आसान हो जाती है...
हाँ कई बार टूटते-टूटते,
बिखरते-बुखरते...
इस रिश्ते को सम्हाला है मैंने..
हम साथ है आज..
ये गवाह है हमारे एहसास के रिश्ते का.…
कोई कुछ भी कहे,
पर मैं देख सकती हूं,
तुम्हारी आँखों मे अपने लिये वो साथ,
जो तुम हमेशा से मेरा देना चाहते हो....
ये दुनिया है जो कहती है,
कि मुझे भ्रम है कि...
तुम मेरा साथ हो,
कैसे समझाऊँ इस दुनिया को..
कुछ एहसास सिर्फ महसूस किये जाते है,
दिखायी नही देते.…
और अगर ये भ्रम है तो,
इसे भ्रम ही रहने दो,
मैं जिंदगी आसान कर लेती हूं,
तुम्हारे साथ होने के भ्रम में...!!!

Sunday, 7 January 2018

गुजरे लम्हे...!!!

कभी गुजरे हुए लम्हो के लिए
अफसोस ना करना,
क्यों कि जो गुजरा है,
वो जिंदगी के सबसे खास लम्हे थे..
कोशिश करना उन्हें फिर जीने की,
उन्हें जिंदगी से मिटाने की कोशिश ना करना...
मान लोगे गर कि,
सब यूँ ही बेवजह,बेमतलब गुजरा है,
तो हमारा साथ सिर्फ इक धोखा हो जएगा...
मैं जी रही हूं उन्ही लम्हो के यकीन पर...
गर ऐसा लगे भी तुम्हे तो,
मुझे बताने की कोशिश ना करना...

Tuesday, 19 December 2017

प्यार को हारने नही दिया....!!!

बहुत इम्तहानों से गुजरा ये साल,
कभी तुम्हारे रूठने में,
कभी तुम्हे मनाने में..
कभी प्यार से भरी तुम्हारी  शिकायतों में,
कभी तुम्हे खो देने के डर से,
रातो की मेरी सिसकियों में..
बिखरते-बिखरते....
मेरे-तुम्हारे रिश्ते के सँवरने में...
इम्तहान था...तो फेल तो हुए,
पर हमारे बीच प्यार की गहराई के,
ग्रेश मार्क्स से पास भी हो गए...
नाराजगी,गलतिया,शिकायतें,
इन सब को दरकिनार कर,
बस हमारे प्यार ने,
प्यार को हारने नही दिया....!!!

Saturday, 9 December 2017

तारीखे कहाँ बदलती है....!!!

तारीखे कहाँ बदलती है,
ये तो बदलते वक़्त के बार-बार,
खुद दोहराती है...
गुजरी तारीखों में कैद कुछ यादो को,
हम उन्ही तारीखों के लौट आने पर,
फिर उन्हें जीते है...
दर्द हो या खुशी,हम उलझे रहते है,
तारीखों के हेर-फेर में..
ये साल ये तारीखे,
सिर्फ कैलेंडर के साथ बदल जायँगे,
ये तारीखे तो कैलेंडर में,
फिर वापस आ जएँगी,
पर जो बिछड़ गये है हमसे,
वो सिर्फ यादो में ही राह जायँगे...
चलो हिसाब कुछ उन यादो का,
उन दर्दो का इन तारीखों का साथ कर लेते है...
तुम मिलना इस बार मुझे उन्ही तारीखों,
साथ बैठ कर कुछ बात फिर कर लेते है...
तारीखे कहाँ बदलती है,
ये तो बदलते वक़्त के,
बार-बार खुद दोहराती है...!!!

Monday, 4 December 2017

आज सारे गुबार दिल के...!!!

क्यों ना लिख दूँ,
आज सारे गुबार दिल के...
ये मौन ये चुप्पी इक दिन,
सब बिखेर कर रख देगी..
क्यों ना लिख दूँ आज सारे ज्वार दिल के....
क्यों ना शब्दो मे लपेट कर,
अपनी आँखों की उदासी को ,
कागज़ में उतार दूँ,
तुमसे मिलने बिछड़ने के किस्सो को...
शब्दो मे सही,क्यों ना जोड़ दूँ,
दिल बिखरे हिस्सो को...
क्यों ना लिख दूँ...
आज सारे गुबार दिल के...
क्यों ना हर दर्द को पंक्तियों में ढाल दूँ,!
तुम्हारे हर जवाब पर मैं इक सवाल दूँ...
क्यों ना हार-जीत का शिलशिला,
यही पर थम जाए...
ये मौन ये चुप्पी इक दिन,
सब बिखेर कर रख देगी..
क्यों ना लिख दूँ...
आज सारे ज्वार दिल के....!!!

Tuesday, 10 October 2017

बिखरती चली गई...!!!

प्यार इक शब्द...
जो दिल से दिल को जोड़ता है,
बस इतना ही तो मैं समझती थी..
कोई होता है जो,
जाने कब कहाँ मिल जाये,
कब वो किसी के ख्वाबो-ख्यालो,
पर छा जाये,
बस इतना ही तो जानती थी,
समझती थी मैं प्यार को...
तुम्हारे प्यार में यूं ही गहराइयों में,
उतरती चली गयी..
बहुत सीधी सी जो दिखती थी,
जो राहे तुम तक पहुँचने की,
जाने कब उलझती चली गयी...
मैं प्यार को अपने शब्दो से,
तुम तक पहुँचाना चाहती थी..
तुम्हारे शब्दो को घाव से,
मैं किसी असहनीय दर्द की खाई में,
धसती चली गयी....
तुम्हे मुस्कराने की वजह ढूंढती रही हर पल,
हर पल के साथ,
मै हँसी अपनी खोती चली गयी....
तुम्हारा साथ देने की जिद में..
मैं खुद को छोड़ कर,
तुमसे जुड़ती चली गयी...
तुम छोड़ कर जब चले गये..
मैं तब हर पल टूट कर,
बिखरती चली गई...!!!